सिपाही ने कहा कि वो दूध नहीं लाएगा, फिर क्या हुआ जाने

 दिल्ली पुलिस के एक एसीपी का रोजाना दूध लाने वाले सिपाही का इनकार विवाद बना गया और फिर चर्चा में भी आ गया। यह मामला आलाधिकारियों तक भी पहुंच गया है। दरअसल सिपाही ने साफ-साफ कह दिया कि वह दूध नहीं लाएगा।

दिल्ली पुलिस में इन दिनों एसीपी अजय कुमार की अफसरशाही और सिपाही की हाजिर जवाबी चर्चा का विषय बनी हुई है। हुआ यूं कि एसीपी साहब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तैनात थे, तो गोकलपुरी के एक डेरी का दूध उनके मुंह लग गया।

उनका वाहन चालक यहां से रोजाना दो किलो दूध लेकर गुलाबी बाग में घर पहुंचाता था। उनका तबादला मध्य जिले में हुआ तो उन्होंने यहां भी चालक को दूध लाने का आदेश सुना दिया, लेकिन यहां पर चालक ने साफ बोल दिया, साहब हम आपका दूध नहीं ला पाएंगे।

उधह, सिपाही का ये जवाब साहब को हजम नहीं हुआ और उन्होंने उसे लाइन हाजिर कर दिया। ये मामला जब डीसीपी श्वेता चौहान के दरबार में पहुंचा तो उन्होंने चालक को फिर से तैनाती दे दी। इसके बाद एसीपी को कड़ी फटकार लगाई और यहां तक कह दिया कि सिपाही को वेतन आपका दूध लाने के लिए नहीं मिलता है।

ये तो नाइंसाफी है साहब

पुलिस महकमे को नया मुखिया मिलने के साथ ही उन अफसरों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है, जो राकेश अस्थाना के समय मुंह तक खोलने से डरते थे। अस्थाना ने दिल्ली पुलिस के करीब 200 इंस्पेक्टरों को पदोन्नत कर एसीपी बनाया था। एसीपी बनते ही इन सभी अफसरों ने डीसीपी को मिलने वाली गाड़ियों को मांगना शुरू कर दिया था, लेकिन राकेश अस्थाना की घुड़की के बाद सभी शांत बैठ गए थे। उनके विदा होते ही इन अफसरों की ख्वाहिशों को फिर पंख लग गए हैं और उन्होंने फिर वाहनों की मांग शुरू कर दी है। एसीपी कह रहे हैं कि नार्दन रेंज के एक जिले के डीसीपी के पास छह सरकारी वाहन हैं, लेकिन उन्हें सरकारी काम के लिए एक भी वाहन नहीं दिया जा रहा है। यह तो हम लोगों के साथ नाइंसाफी है, इसलिए अब उन्हें भी कम से कम एक वाहन तो दिया जाए।

खटक रहा महिला आइपीएस का बंगला

पुलिस महकमे के अफसरों की आंख में एक महिला आइपीएस का टाइप-6 बंगला खटक रहा है। यह बंगला उन्हें कैसे मिला, इसे लेकर हर कोई पुलिस मुख्यालय में जासूसी करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, खुलकर कोई कुछ नहीं बोल रहा है, लेकिन उन्हें देखते ही इतना जरूर बोल रहे हैं कि किस्मत हो तो ऐसी। क्वार्टर अलाटमेंट कमेटी के चेयरपर्सन विशेष आयुक्त होते हैं, जो सभी पुलिस कर्मियों को आवास अलाट करते हैं, लेकिन पुलिस आयुक्त की सिफारिश इसमें अहम होती है। पिछले दिनों महिला आइपीएस को पदोन्नत कर एडिशनल डीसीपी बनाया गया था, फिर उन्हें डीसीपी का चार्ज दे दिया गया। इसके बाद उन्हें हौजखास स्थित टाइप-6 बंगला मिल गया, जो कुछ दिन पहले ही एक विशेष आयुक्त के सेवानिवृत्त होने पर खाली हुआ था। ऐसे में आयुक्त की रैंक वाले अफसर के बजाय डीसीपी को बंगला मिलने की बात किसी अफसर को हजम नहीं हो रही है।

नई लिस्ट को लेकर पुलिस विभाग ने चर्चा की

राकेश अस्थाना के सेवानिवृत्त होने और संजय अरोड़ा के नए पुलिस आयुक्त बनने के बाद से ही महकमे में चर्चा शुरू हो गई थी कि अरोड़ा 15 अगस्त के बाद बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले करेंगे। ऐसा सभी आयुक्त करते रहे हैं, इसलिए एक बार फिर तबादले का सिलसिला शुरू होना तय है। लिहाजा अब नई लिस्ट को लेकर मुख्यालय में खूब चर्चा हो रही है। इसमें जिलों में तैनात पांच से छह डीसीपी को दूसरे राज्यों में भेजे जाने को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। इन अफसरों का कार्यकाल बेहद खराब रहा है, लेकिन पुराने आयुक्त से बेहतर संबंध के कारण वे जिलों में टिके रहे। इन अफसरों की भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें भी मिलती रही हैं। आयुक्त के रूप में तैनाती होने के बाद से ही संजय अरोड़ा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपना रखा है। अब इनके खिलाफ भी उनकी भृकुटि तन गई है।

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