साल के पहले रविवार पर करें सूर्यदेव को प्रसन्न, पूरे वर्ष मिलेगी अच्छी सेहत और सफलता

हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। वे जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आत्मबल और यश के दाता हैं। सप्ताह का प्रत्येक रविवार सूर्यदेव को समर्पित होता है, लेकिन जब रविवार साल का पहला रविवार हो, तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन 6 उपाय करने से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
प्रातः सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य दें
साल के पहले रविवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठें। स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, लाल फूल, रोली और चावल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, नेत्र रोग दूर होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें
रामायण में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र को सूर्य उपासना का श्रेष्ठ मंत्र माना गया है। पहले रविवार को इसका पाठ करने से मानसिक तनाव, भय और असफलता दूर होती है। जो लोग करियर, मान-सम्मान और सरकारी कार्यों में सफलता चाहते हैं, उनके लिए यह पाठ अत्यंत लाभकारी माना गया है।
लाल वस्त्र धारण करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार लाल रंग सूर्यदेव का प्रिय रंग है। इस दिन लाल या केसरिया वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता, साहस और निर्णय शक्ति का विकास होता है।
गुड़ और गेहूं का दान करें
साल के पहले रविवार को गुड़, गेहूं, तांबा या लाल फल का दान करना विशेष पुण्यदायी माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि इससे सूर्य ग्रह से संबंधित दोष शांत होते हैं और आर्थिक समस्याओं में कमी आती है। यह उपाय विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है।
सूर्य नमस्कार करें
योग शास्त्र में सूर्य नमस्कार को जीवनदायिनी क्रिया माना गया है। इस दिन सूर्य नमस्कार करना शुभ होता है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है। धार्मिक दृष्टि से यह सूर्यदेव को साक्षात नमन करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।
नमक और तेल का सेवन सीमित रखें
पौराणिक मान्यता के अनुसार रविवार के दिन नमक और तेल का सेवन सीमित या त्याग करना चाहिए। खासकर साल के पहले रविवार को यह नियम पालन करने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।



