ग्रीन एजेंडे पर केंद्र सरकार का जोर: बजट में एनजीटी-सीपीसीबी को मिली ताकत

केंद्रीय बजट 2026-27 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के बजट में बीते वर्ष की तुलना में करीब 246 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साफ हवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इस बार बजट में खास ध्यान दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का बजट बढ़ाकर 123 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को मजबूती देने पर विशेष जोर दिया गया है। बजट में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के बजट में बीते वर्ष की तुलना में करीब 246 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इससे पर्यावरण से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई और प्रभावी होगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को भी अतिरिक्त संसाधन दिए गए हैं ताकि प्रदूषण पर नियंत्रण मजबूत किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, कुल मिलाकर यह बजट पर्यावरण की रक्षा के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।
साफ हवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इस बार बजट में खास ध्यान दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का बजट बढ़ाकर 123 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को भी अधिक संसाधन दिए गए हैं और इसका बजट बढ़कर 220.69 करोड़ रुपये हो गया है। इन बढ़े हुए प्रावधानों से प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयास तेज होंगे और लोगों को स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।
बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में 50.31 करोड़ रुपये मिले थे। इस बार यह आंकड़ा लगभग 246 प्रतिशत बढ़ गया है। साल 2026-27 की तो 173.75 करोड़ रुपये एनजीटी को देने का प्रस्ताव है। इससे पर्यावरण मामले को सुलझाने में और गति मिलेगी। अदालत का आधुनिकीकरण भी होगा। बता दें कि 2025 में 53281 संस्थानों में कुल 47642 केस निपटाए गए। 5639 कुल मामले लंबित है।
साफ हवा के लिए प्रयास होंगे तेज
साफ हवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इस बार बजट में खास ध्यान दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का बजट बढ़ाकर 123 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष 116.20 करोड़ रुपये था। वहीं, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को भी अधिक संसाधन दिए गए हैं और इसका बजट बढ़कर 220.69 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि बीते साल यह 195.42 करोड़ रुपये था। इन बढ़े हुए प्रावधानों से प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रयास तेज होंगे और लोगों को स्वच्छ व स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।
विशेषज्ञों की राय
बजट में घोषित ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ एक अहम और व्यावहारिक कदम है। इससे राज्य स्तर पर खनिजों के प्रसंस्करण और निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। कर छूट और आयात शुल्क में राहत से निजी निवेश के जोखिम कम होंगे। यह पहल खनन और विनिर्माण के बीच की दूरी को कम कर भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाएगी। -ऋषभ जैन, शोधकर्ता, सीईईडब्ल्यू
बजट 2026-27 देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला है। इसमें ऊर्जा, तकनीक, शहरों और कृषि को मजबूत करने पर जोर है। रेयर अर्थ कॉरिडोर और सेमीकंडक्टर मिशन से राज्य स्तर पर विकास को गति मिलेगी। जलवायु अनुकूल शहर, कार्बन कटौती, डिजिटल कृषि और आपदा प्रबंधन के उपाय भारत को टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएंगे। -डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, सीईईडब्ल्यू
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