क्या आंखों की जांच से सालों पहले लग सकेगा अल्जाइमर का पता?

क्या आप जानते हैं कि हमारी आंखें हमारे दिमाग की स्थिति का राज खोल सकती हैं? जी हां, एक हालिया शोध में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अब आंखों के पर्दे (रेटिना) की जांच से अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी का पता बहुत पहले लगाया जा सकता है, वह भी तब, जब दिमाग को नुकसान पहुंचना शुरू भी न हुआ हो।

‘दिमाग की खिड़की’ के सही हिस्से की पहचान
अमेरिका के ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल के शोधकर्ता स्टीफन वोंग के अनुसार, “आंखें दिमाग की खिड़की होती हैं।” उनका कहना है कि अब तक हम इस खिड़की के गलत हिस्से में झांक रहे थे। आमतौर पर आंखों की जांच रेटिना के बीच वाले हिस्से पर केंद्रित होती है। लेकिन, इस नए अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि अल्जाइमर रोग के सबसे अहम और शुरुआती संकेत आंख के बाहरी हिस्से में छिपे होते हैं।

याददाश्त जाने से सालों पहले शुरू हो सकेगा इलाज
इस नई खोज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे समय रहते बीमारी को पकड़ा जा सकता है। याददाश्त कमजोर होने और दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचने से कई साल पहले ही रेटिना में बदलाव होने लगते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर लोग नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं, तो डॉक्टर इन शुरुआती बदलावों को पहचान सकते हैं। इससे बीमारी का समय पर पता लगाकर इलाज शुरू किया जा सकता है।

क्या है इसके पीछे का विज्ञान?
यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है, इसे पिछले शोधों के आधार पर समझा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि अल्जाइमर रोग का एक प्रमुख लक्षण दिमाग में ‘एमिलायड प्रोटीन’ का जमा होना है। ठीक ऐसा ही एमिलायड प्रोटीन आंखों के रेटिना में भी इकट्ठा होने लगता है। इसका सीधा मतलब यह है कि रेटिना में होने वाले बदलाव, दिमाग के अंदर चल रही बीमारी की असली स्थिति को दर्शाते हैं।

Related Articles

Back to top button