पंजाब के निर्यातकों को भू-राजनीतिक तनाव: समुद्री संकट ने निर्यात की बढ़ाई कीमत

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, बाधित समुद्री मार्ग और बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत ने पंजाब के निर्यात आधारित उद्योगों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
विदेशी बाजारों से ऑर्डर मिलने के बावजूद बढ़ता मालभाड़ा, लंबा ट्रांजिट टाइम, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और महंगे कच्चे माल ने निर्यातकों के मार्जिन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
निर्यात कंटेनर की लॉजिस्टिक्स लागत में चालीस फीसदी से अधिक का इजाफा हुआ है। पंजाब के लुधियाना जैसे निर्यात केंद्रों में निटवियर, होजरी, रेडीमेड गारमेंट्स, साइकिल एवं साइकिल पार्ट्स, इंजीनियरिंग और अन्य एमएसएमई सेक्टरों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। निर्यातकों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में केवल ऑर्डर हासिल करना पर्याप्त नहीं रह गया है। उस ऑर्डर को प्रतिस्पर्धी लागत पर पूरा करना बड़ी चुनौती बन गया है।
निटवियर अपैरल मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गेनाइजेशन के प्रधान हरीश दुआ ने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से अवसर बढ़े हैं लेकिन बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागत कारोबार का गणित बिगाड़ रही है। निर्यातक विदेशी बायर्स के साथ बातचीत कर कीमतों को नए सिरे से तय कर रहे हैं। समुद्री मार्गों में व्यवधान के कारण डिलीवरी में भी अधिक समय लग रहा है। इससे इन्वेंटरी और कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ रही है।
लागत का बढ़ता दबाव
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) के एक्सपोर्ट प्रमोशन विंग के प्रधान राम लुभाया ने बताया कि डॉलर करीब 87 रुपये से बढ़कर 96 रुपये के आसपास पहुंच गया है। कमजोर रुपया पहली नजर में फायदेमंद दिखता है लेकिन लागत बढ़ने के कारण यह लाभ खत्म हो रहा है।
कंटेनरों का किराया भी चालीस फीसदी तक बढ़ गया है। दूसरे कंटेनर मिलने में भी दिक्कतें आ रही हैं। विदेशी लॉजिस्टिक्स और मालभाड़े का भुगतान महंगा हो रहा है। मशीनरी, फाइबर, केमिकल, धातु और अन्य आयातित कच्चे माल की लागत भी बढ़ रही है। रुपये की कमजोरी से मिलने वाला संभावित निर्यात लाभ इन बढ़ी हुई लागतों में ही समा जा रहा है।
नीतिगत सहयोग और बाजार विविधीकरण
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में लगातार व्यवधान निर्यातकों के लिए मुश्किल है। जियोपॉलिटिकल तनाव, शिपिंग में रुकावट और बदलती ट्रेड पॉलिसी वैश्विक कारोबार के बड़े जोखिम हैं। भारतीय निर्यातक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी बाजार बनाए रखने में सक्षम हैं। इसके लिए लगातार नीतिगत सहयोग जरूरी है। प्रतिस्पर्धी दरों पर एक्सपोर्ट क्रेडिट, आसान वर्किंग कैपिटल और तेज ट्रेड प्रक्रियाएं आवश्यक हैं। पंजाब को यूरोप, ब्रिटेन, पश्चिम एशिया जैसे उभरते बाजारों में निर्यात का विस्तार करना चाहिए। उत्पादों में वैल्यू एडिशन पर जोर देना समय की जरूरत है। सरकार को फ्रेट, क्रेडिट और लॉजिस्टिक्स मोर्चे पर समानांतर राहत देनी होगी।



