माही बांध के गेट खुलने से पहले ही टापू बना बेणेश्वर धाम

मानसून की तेज बारिश से वागड़ अंचल में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। पहली बार माही बांध के गेट खुलने से पहले ही बेणेश्वर धाम चारों ओर से पानी से घिर गया, जिससे प्रशासन अलर्ट मोड पर है।

वागड़ अंचल में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। पिछले 24 घंटे के दौरान बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह से आसमान घने बादलों से ढंका रहा और पूरे दिन सूरज के दर्शन नहीं हुए।

लगातार बारिश के कारण दोनों जिलों की नदियों और बरसाती जलधाराओं का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। इसका सबसे अधिक असर दोनों जिलों की सीमा पर स्थित आदिवासी आस्था के प्रमुख तीर्थ बेणेश्वर धाम पर देखने को मिला, जहां चारों ओर पानी भर जाने से धाम एक बार फिर टापू में तब्दील हो गया। नदियों में जलस्तर बढ़ने से बांसवाड़ा, साबला और वालाई के पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने इन पुलों पर वाहनों और लोगों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं। लोगों से अपील की गई है कि पानी उतरने तक वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और किसी भी स्थिति में बहते पानी को पार करने का प्रयास न करें।

माही बांध के गेट खुलने से पहले ही टापू बना बेणेश्वर धाम
इस बार की बारिश में पहली बार ऐसा हुआ है कि माही बांध के गेट खोले जाने से पहले ही बेणेश्वर धाम टापू बन गया। आमतौर पर माही बांध से पानी छोड़े जाने के बाद धाम तक पहुंचने वाले मार्ग जलमग्न होते हैं लेकिन इस बार ऊपरी कैचमेंट क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण सोम, माही और जाखम नदियों में पानी की आवक इतनी बढ़ गई कि धाम चारों ओर से पानी से घिर गया।

लगातार बारिश से मौसम सुहावना हो गया है। वहीं प्रशासन नदियों और नालों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी-नालों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और केवल प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

Related Articles

Back to top button