सार्वजनिक जीवन के 12 साल : नरेंद्र मोदी के सानिध्य में सुशासन के सूत्रधार बने मनोहर लाल!

हरियाणा की राजनीति में 26 अक्तूबर 2014 का दिन एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुआ, जब प्रदेश में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और मनोहर लाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। संगठनात्मक अनुभव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लंबे समय तक काम करने के चलते उनके विश्वासपात्र के तौर पर मनोहर लाल को प्रदेश की बागडोर सौंपी गई। अनेक चुनौतियाेंं के बावजूद मनोहर लाल ने हौसले के साथ हरियाणा में शासन-प्रशासन की कार्यशैली में बदलाव, सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था को लेकर एक नए सफर की शुरुआत की। मुख्यमंत्री के रूप में लगभग साढ़े नौ वर्ष तक प्रदेश की कमान संभालने के बाद जून 2024 में मनोहर लाल केंद्र सरकार में ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री बने। इस तरह सार्वजनिक जीवन में उनके 12 वर्षों का सफर राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक प्रशासनिक सुधारों और विकास संबंधी प्राथमिकताओं के विस्तार की कहानी बयां करता है।

उल्लेखनीय है कि मनोहर लाल की राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा उनके शासन संबंधी दृष्टिकोण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। संगठन में नरेंद्र मोदी के साथ लंबे समय तक काम करने के बाद मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिलने और फिर केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का दायित्व संभालने तक उनके सफर में नेतृत्व के प्रति विश्वास और प्रशासनिक अनुभव की भूमिका साफ नजर आई। प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन मॉडल तकनीक के इस्तेमाल, पारदर्शिता, नागरिक-केंद्रित सेवाओं और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष फोकस रहा उसी प्रकार हरियाणा में भी मनोहर लाल सरकार ने ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल प्रशासन और योग्यता आधारित भर्ती जैसे विषयों को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने रखा। यही नहीं मनोहर लाल ने प्रदेश में प्रशासनिक सुधारों को राजनीतिक प्राथमिकता बनाकर सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।  

ऐसे में कहा जा सकता है कि मनोहर लाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सानिध्य में प्रदेश में सुशासन के सूत्रधार बनकर उभरे। मनोहर लाल के व्यक्तित्व की खास बात यह रही कि उन्हें कभी धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाओं की लालसा नहीं रही। सत्ता के शीर्ष पद पर पहुंचने के बावजूद उन्होंने सादगी और सेवा के अपने सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपना पुश्तैनी मकान पुस्तकालय के लिए दान कर दिया, ताकि समाज के लोगों को ज्ञान और शिक्षा का लाभ मिल सके। वहीं अपने हिस्से की कृषि भूमि को बेचकर उससे प्राप्त धनराशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवा  दिया। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाले वेतन को भी उन्होंने अपने पास रखने के बजाय प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवा दिया। उनके ये कदम सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं।यही वजह है कि भाजपा कार्यकर्ता मनोहर लाल को सियासत का संत भी कहते हैं। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में मनोहर लाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में सरकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना, नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना और प्रशासन में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना शामिल था। उन्होंने शासन की पारंपरिक प्रक्रियाओं में बदलाव लाने के लिए ई-गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं को प्राथमिकता दी। इस कार्यशैली का एक प्रमुख उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना, बिचौलियों की भूमिका खत्म करना तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ाना था। संपत्ति पंजीकरण, सरकारी सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में ऑनलाइन व्यवस्था का विस्तार इसी दिशा में उठाए गए कदमों में शामिल रहा। मनोहर लाल के नेतृत्व में हरियाणा में व्यवस्था परिवर्तन को केवल तकनीकी सुधार तक सीमित रखने के बजाय शासन की कार्यप्रणाली बदलने के प्रयास के रूप में लिया गया। इन पहलों ने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और नागरिकों की सुविधा को नई प्राथमिकता दी। हरियाणा में सरकारी नौकरियों की भर्ती व्यवस्था लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। 

मनोहर लाल सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में योग्यता और मेरिट को प्राथमिकता देने तथा पर्ची-खर्ची की व्यवस्था को समाप्त करने के संकल्प साकार रूप दिया। सरकार की ओर से यह संदेश दिया गया कि सरकारी नौकरी प्राप्त करने का आधार अभ्यर्थी की योग्यता होनी चाहिए, न कि राजनीतिक पहुंच या सिफारिश। भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित मानदंडों और परीक्षा आधारित चयन पर जोर देकर युवाओं के बीच पारदर्शी व्यवस्था की छवि बनाने  मनोहर लाल द्वारा स्थापित बिना पर्ची-बिना खर्ची  नौकरी व्यवस्था का यह नतीजा रहा काबिल युवाओं को बिना सिफारिश व रिश्वत के नौकरियां मिलने लगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक नेताओं ने खुले मन से उनकी इस नीति की प्रश्ंसा की। 12 मार्च 2024 को मनोहर लाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हुआ। जून 2024 में करनाल लोकसभा सीट से निर्वाचित होने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। 9 जून 2024 को उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री के रूप में शपथ ली।

 राज्य सरकार में प्रशासनिक प्रक्रियाओं और विकास संबंधी निर्णयों का अनुभव अब उनके सामने राष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के संदर्भ में उपयोग करने का अवसर लेकर आया। ऊर्जा क्षेत्र में आपूर्ति, आधारभूत ढांचे और भविष्य की मांगों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करना तथा शहरों में नागरिक सुविधाओं और शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना उनके मंत्रालयों की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी के साथ काम करने के अनुभव ने उन्हें नीतियों के क्रियान्वयन, विभिन्न विभागों के समन्वय और विकास परियोजनाओं की निगरानी में मदद की । 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के रूप में मनोहर लाल के सामने देश की बढ़ती बिजली मांग, ऊर्जा आपूर्ति की विश्वसनीयता, उत्पादन और वितरण व्यवस्था की दक्षता तथा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसी चुनौतियां हैं, जिन्हें लेकर वे पिछले लगभग 2 साल से काम कर रहे हैं। मनोहर लाल संभवत: पहले ऐसे केंद्रीय मंत्री हैं, जिन्होंने देश के सभी राज्यों का दौरा करके अपने विभागों से संबंधित चल रही परियोजनाओं की समीक्षा बैठकें करने के साथ-साथ नई योजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर  प्रभावी कदम उठाए हैं।यही नहीं देश में यातायात व्यवस्था को सुचारू करने व मैट्रो के विस्तार को लेकर भी वे पूरी से सक्रिय नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री व अब केंद्रीय मंत्री के रूप में मनोहर लाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से सिद्धि तक के उनके सपने को साकार करते दिखाई देते हैं।

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