इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में दो लाख पेड़ काटने की तैयारी, ग्रीन कवरेज एरिया घटा

इंदौर की हरियाली लगातार कम हो रही है। इंदौर ने भले ही देश में सबसे ज्यादा पौधे लगाने का विश्व रिकार्ड बनाया, लेकिन उन पौधों को वृक्ष बनने में लंबा समय लगेगा। फिलहाल शहर में विकास के नाम पर बेशुमार पेड़ों को काटा जा रहा है।

शब-ए-मालवा की सुहानी शामों के लिए प्रसिद्ध रहे इंदौर का मौसम अब बदल गया है। गर्मी में भी शामें ठंडक नहीं देती हैं। इंदौर और उसके आसपास से तेजी से विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं। दो लाख से ज्यादा पेड़ों को काटने की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन उसकी तुलना में पेड़ उतने नहीं लग पा रहे हैं। इस कारण शहर के कई इलाके हरियाली का सूनापन झेल रहे हैं।

सबसे ज्यादा पेड़ों की बलि इंदौर-खंडवा रेल मार्ग के लिए ली जा रही है। 1.54 लाख पेड़ काटे जाएंगे। इसके अलावा इंदौर-खंडवा फोरलेन के लिए 9 हजार 600 पेड़ काटे जा चुके हैं। इंदौर में भी ब्रिज, मेट्रो व अन्य विकास के कामों के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है। उसकी तुलना में शहर में कम सिटी फॉरेस्ट बन पाए हैं। मास्टर प्लान में जो एरिया ग्रीन बेल्ट है, वे भी अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए हैं। मास्टर प्लान 2021 के लिए 14 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट तय किया गया था, लेकिन मौके पर ग्रीन बेल्ट 8 प्रतिशत भी नहीं बचा है।

पांच साल में हजारों पेड़ काटे गए
इंदौर में पांच साल में हजारों की संख्या में पेड़ काटे गए। इसके अलावा अवैध कटाई भी होती है। उन पेड़ों की जानकारी तो सामने ही नहीं आ पाती है। इंदौर में इंदौर से तेजाजी नगर बायपास तक फोरलेन सड़क के लिए एक हजार पेड़ काटे गए। इसके अलावा एमओजी लाइन में पचास पुराने पेड़ काटे गए। मल्हार आश्रम में भी 80 से 100 साल पुराने 95 से ज्यादा पेड़ काटे गए। विजय नगर मेट्रो स्टेशन और ब्रिज के लिए 180 पेड़ों की बलि ली गई। कुछ पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया, लेकिन वे पनप नहीं पाए।

इन प्रोजेक्टों के लिए काटे जाएंगे पेड़
इंदौर-खंडवा रेल लाइन के लिए 1.54 लाख पेड़ काटने की अनुमति वन विभाग से रेलवे को मिल चुकी है। इंदौर-बुधनी रेल लाइन के लिए 277 पेड़ इंदौर के हिस्से में चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन के लिए 5175 पेड़ काटे जाएंगे। हुकमचंद मिल परिसर से पांच हजार पेड़ काटे जा रहे हैं। वहीं पश्चिमी क्षेत्र के बायपास के लिए पांच हजार से ज्यादा पेड़ों की बलि ली जाएगी।

आठ प्रतिशत रह गई हरियाली
मास्टर प्लान में हरियाली 14 प्रतिशत है, लेकिन हकीकत में आठ प्रतिशत हरियाली बची है। पिपलियापाला, बिलावली, सिरपुर जैसे ग्रीन बेल्ट एरिया में बस्तियां हैं। मास्टर प्लान में दो रीजनल पार्क हैं, लेकिन शहर में एक पार्क ही विकसित हो पाया है। इसके अलावा 15 से ज्यादा सिटी पार्क हैं, लेकिन तीन सिटी पार्क भी ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाए हैं। – जयवंत होलकर, मास्टर प्लान विशेषज्ञ

गिनती में इंदौर में 1.70 लाख सरकारी पेड़
इंदौर में मेरी याचिका पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को पेड़ों की गिनती के निर्देश दिए थे। तब निगम ने मार्ग, मुक्तिधाम व उद्यानों में पेड़ों की गिनती की थी। तब 1.70 लाख पेड़ शहर में पाए गए थे। विकास के नाम पर जो पेड़ काटे जाते हैं, उसकी तुलना में पेड़ नजर नहीं आते। हर साल पौधारोपण होता है, लेकिन लगाए गए पौधों की देखभाल में सरकारी विभाग पीछे है। – किशोर कोडवानी, सामाजिक कार्यकर्ता

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