डोनल्ड ट्रंप अपनी मर्जी से कर रहे है शेयर बाजार क्रैश, उतार-चढ़ाव?

शेयर बाजार (Stock Market) की चाल आमतौर पर आर्थिक डेटा, फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के फैसलों और कॉर्पोरेट जगत के विकास से तय होती है। लेकिन पिछले 15 महीनों से, ट्रेडर्स की किस्मत काफी हद तक एक ही व्यक्ति की मर्जी से बंधी हुई है। वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) हैं।
ट्रंप के बयानों का बाजार पर कितना बड़ा असर है?
फंडस्ट्रैट रिसर्च (Fundstrat Research) के एक विश्लेषण के मुताबिक, पिछले जनवरी में सत्ता संभालने के बाद से S&P 500 इंडेक्स के पांच सबसे अच्छे और सबसे बुरे दिनों के पीछे ट्रंप के बयान ही मुख्य कारण रहे हैं। चाहे वह ओवल ऑफिस में पत्रकारों से की गई बातचीत हो, प्रेस कॉन्फ्रेंस हो या फिर सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट।
1981 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन (Ronald Reagan) के समय से लेकर अब तक किसी भी आधुनिक अमेरिकी नेता ने बाजार पर इतनी मजबूत पकड़ नहीं बनाई है।
फंडस्ट्रैट की इकोनॉमिक स्ट्रैटेजिस्ट हार्दिक सिंह (Hardika Singh) कहती हैं, “उन्होंने बाजार को अपने शिकंजे में ले लिया है। एक राष्ट्रपति से शेयर बाजार पर इस तरह के असाधारण नियंत्रण की उम्मीद नहीं की जाती है। यह पूरी तरह से अभूतपूर्व है।”
ईरान युद्ध के दौरान बाजार को कैसे नचा रहे हैं ट्रंप?
ईरान में चल रहा युद्ध यह देखने के लिए एक सटीक पृष्ठभूमि है कि ट्रंप अमेरिकी शेयरों को कितना प्रभावित कर सकते हैं। S&P 500 ने 2020 के बाद अपनी सबसे तेज ‘V-आकार’ की गिरावट और रिकवरी दर्ज की। 27 जनवरी के उच्चतम स्तर से 30 मार्च तक यह 9% गिर गया था, लेकिन अगले 11 कारोबारी दिनों में वापस अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया।
20 मार्च: S&P 500 में 1.5% की गिरावट आई, क्योंकि ट्रंप ने व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में कहा कि वह ईरान के साथ युद्धविराम (Ceasefire) नहीं चाहते हैं।
31 मार्च: इंडेक्स 2.9% उछल गया (मई के बाद का सबसे अच्छा दिन), और बाकी हफ्ते भी तेजी में रहा, क्योंकि ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है और युद्ध खत्म होने के करीब है। कमोडिटी की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। बार्कलेज (Barclays) में ग्लोबल इक्विटी टैक्टिकल स्ट्रैटेजीज के प्रमुख अलेक्जेंडर ऑल्टमैन के अनुसार, युद्ध पर ट्रंप के बदलते रुख ने उन्हें बाजार के लिए”आगजनी करने वाला और दमकलकर्मी” (Arsonist and firefighter) दोनों बना दिया है।
बाजार हर दिन ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट का इंतजार क्यों करता है?
बाजार के इन झटकों की तुलना पिछले साल टैरिफ के कारण आई गिरावट और उसके बाद की रिकवरी से की जा सकती है। दोनों ही मामलों में पॉलिसी में अचानक आए बदलावों ने बाजार को हिलाया और फिर फैसलों के पलटने से रिकवरी हुई। वॉल स्ट्रीट अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि वह हर दिन पॉलिसी और बयानों में बदलाव की उम्मीद कर रहा है।
बेयर्ड प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट (Baird Private Wealth Management) के निवेश रणनीतिकार रॉस मेफील्ड के अनुसार, “निवेशकों को यह उम्मीद करने की आदत पड़ गई है कि अगर हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तो वे उस ट्वीट का इंतजार करते हैं जो कहता है कि ‘असल में, सब ठीक है’।”
यार्डेनी रिसर्च के दिग्गज रणनीतिकार एड यार्डेनी का कहना है, “मैंने कभी ऐसा बाजार नहीं देखा जो व्हाइट हाउस की हर दिन की बातों से इतना प्रभावित होता हो। ट्रंप हर दिन कुछ ऐसा कहते हैं जिसका बाजार पर असर पड़ता है।”
ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल में बाजार के सबसे अच्छे और बुरे दिन कौन से रहे?
सबसे अच्छे दिन: 9 अप्रैल, 2025 को बाजार में 9.5% की शानदार तेजी आई जब उन्होंने टैरिफ पर रोक लगाई। इसके अलावा 12 मई, 2025 को अमेरिका और चीन के बीच 90 दिनों के व्यापारिक समझौते (Trade truce) के बाद बाजार 3.3% उछला।
सबसे बुरे दिन: 4 अप्रैल, 2025 को बाजार 6% टूट गया क्योंकि चीन ने अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगाए। इससे एक दिन पहले, 3 अप्रैल, 2025 को ट्रंप द्वारा भारी लेवी (Levies) लागू करने के बाद बाजार में 4.8% की गिरावट आई थी।
क्या वाकई बाजार ज्यादा अस्थिर हुआ है या यह सिर्फ एक भ्रम है?
कुछ वॉल स्ट्रीट विशेषज्ञों का तर्क है कि राष्ट्रपति जो कहते हैं और बाजार जो करता है, उसके बीच का यह संबंध सिर्फ एक भ्रम है और यह उनके बार-बार बयान देने का नतीजा है। बार्कलेज के ऑल्टमैन के विश्लेषण के अनुसार, वोलैटिलिटी (Volatility) के आंकड़े इस बात को गलत साबित करते हैं कि पिछले प्रशासनों की तुलना में ट्रंप के अधीन बाजार अधिक अशांत रहा है। 1990 से अब तक Cboe वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) का औसत मूल्य 19.3 रहा है, जो ट्रंप के दूसरे कार्यकाल और राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) के कार्यकाल के बिल्कुल अनुरूप है। ऑल्टमैन का मानना है कि प्रतिक्रिया का माध्यम बदल गया है (जैसे सोशल मीडिया), न कि प्रतिक्रिया का स्तर।
पैसिव इन्वेस्टिंग का भी है रोल
सिम्प्लीफाई एसेट मैनेजमेंट के पोर्टफोलियो मैनेजर माइकल ग्रीन बताते हैं कि ‘पैसिव इन्वेस्टिंग’ के उदय ने बाजार को खबरों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। जो कंप्यूटर पैसिव पोर्टफोलियो को मैनेज करते हैं, वे हेडलाइन्स के आधार पर संपत्तियां खरीदने या बेचने के लिए प्रोग्राम किए गए हैं। उनके अनुमान के मुताबिक, बाजार ऐतिहासिक रूप से पहले की तुलना में अब चार से पांच गुना अधिक तेजी से रिएक्ट कर रहे हैं।



