पनीर हो या चिकन करी, इस गार्लिक लच्छा पराठा के साथ बढ़ जाएगा हर डिश का मजा

उत्तर भारतीय थाली में पराठे की खास जगह है। इसके बिना थाली अधूरी लगती है। साधारण आलू या गोभी के पराठे तो हम अक्सर खाते हैं, लेकिन बात अगर कुछ स्पेशल खाने की हो, तो गार्लिक लच्छा पराठा का कोई मुकाबला नहीं।
इसकी हल्की कुरकुरी परतें और लहसुन का स्वाद इसे स्पेशल बनाता है। हालांकि, इसे बनाने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन पनीर या चिकन करी के साथ यह खाने का स्वाद दोगुना कर देता है। आइए जानें घर पर लच्छा पराठा बनाने की आसान रेसिपी।
सामग्री
आटा तैयार करने के लिए-
गेहूं का आटा- 2 कप
नमक- स्वादानुसार
तेल/घी- 1 बड़ा चम्मच (मोयन के लिए)
गुनगुना पानी- आटा गूंथने के लिए
गार्लिक मिक्सचर के लिए-
मक्खन- 3-4 बड़े चम्मच
लहसुन- 2 बड़े चम्मच
हरा धनिया- 2 बड़े चम्मच (बारीक कटा हुआ)
अजवाइन- आधा छोटा चम्मच
बनाने की विधि
सबसे पहले एक बर्तन में आटा, नमक और थोड़ा सा तेल मिलाएं। अब गुनगुने पानी की मदद से एक नरम और आसानी से खिंचने वाला आटा गूंथ लें। इसे मुलायम बनाने के लिए आप आटे के साथ थोड़ा मैदा भी मिला सकते हैं। ध्यान रहे, आटा न तो बहुत सख्त हो और न ही बहुत गीला। अब आटे को ढककर 20-30 मिनट के लिए आराम करने दें। इससे पराठे की परतें अच्छी बनती हैं।
एक छोटी कटोरी में नरम मक्खन, बारीक कटा लहसुन, हरा धनिया और अजवाइन को अच्छी तरह मिला लें। मसालों का यह मिश्रण ही पराठे को उसका असली स्वाद देगा।
अब आटे की मध्यम आकार की लोई लें और उसे सूखे आटे की मदद से एक बड़ी और पतली रोटी की तरह बेल लें। अब इसके ऊपर तैयार किया हुआ गार्लिक बटर का मिश्रण चारों तरफ समान रूप से फैलाएं।
इसके बाद इस रोटी को परतों में मोड़ने की बारी है। रोटी को एक तरफ से उठाकर आगे-पीछे करते हुए फोल्ड करें। जब पूरी रोटी एक लंबी पट्टी जैसी बन जाए, तो इसे गोल घुमाते हुए एक जलेबी जैसा आकार दें और आखिरी सिरे को नीचे दबा दें।
तैयार लोई को हल्के हाथों से दबाएं और सूखे आटे की मदद से बेल लें। ध्यान रहे कि बेलते समय बहुत ज्यादा दबाव न डालें, वरना परतें आपस में चिपक जाएंगी और खुलेंगी नहीं।
तवे को मध्यम आंच पर गरम करें। पराठे को तवे पर डालें और दोनों तरफ से थोड़ा सिकने दें। अब घी या मक्खन लगाकर इसे मध्यम से धीमी आंच पर तब तक सेकें जब तक कि यह दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए। धीमी आंच पर सेकने से परतें अंदर तक पकती हैं और खिलकर बाहर आती हैं।



