बिहार: भाजपा एमएलसी ने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में किया हंगामा, कुलसचिव को दी यह धमकी

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कुलसचिव ने भाजपा एमएलसी को मर्यादा में रहने के लिए कहा तो एमएलसी तुम-ताम करने लगे और खूब खड़ी-खोटी सुनाने लगे। इस घटना से सीनेट में मौजूद सभी सदस्य दंग रह गए।
पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में कुलसचिव प्रोफेसर एनके झा और भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी नवल किशोर यादव के बीच विवाद बढ़ गया है। इस विवाद से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें भाजपा एमएलसी नवल किशोर यादव सरेआम कुलसचिव को धमकाते दिख रहे हैं। आरोप लगा कि गुरुवार को सीनेट की बैठक के दौरान जब कुलसचिव प्रो. एनके झा अपना संबोधन दे रहे थे तब अचानक एमएलसी नवल किशोर यादव अपनी सीट से उठकर खड़े हो गए और हंगामा करने लगे। उन्होंने कुलसचिव एनके झा पर अमर्यादित टिप्पणी की। इससे पहले कि प्रो. एनके झा कुछ बोलते, एमएलसी ने कहा कि “ए बैठो तुम…तुम बैठो.. यह पटना यूनिवर्सिटी नहीं है।”
विधायक बोले- यह कोई जंग का मैदान नहीं है
पालीगंज विधायक संदीप सौरभ व सीनेट के अन्य सदस्यों ने बीच-बचाव किय। इसके बाद विधायक ने कहा कि यह कोई जंग का मैदान नहीं है। यहां सीनेट की बैठक हो रही है। समाज के प्रबुद्ध लोग यहां आए हैं। ऐसे में किसी को भी अपनी मर्यादा भूलनी नहीं चाहिए। अपनी भाषा पर हमें नियंत्रण रखना होगा। मामले में पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव ने कहा कि एमएलसी को मार्यादा का ध्यान रखना चाहिए था। इस व्यवहार को लेकर मैंने उन्हें टोका भी। इस घटना से राज्य में गलत संदेश जाएगा।
कुलसचिव बोले- मैं इस घटना से काफी आहत हूं
इस मामले में कुलसचिव प्रो. एनके झा ने कहा कि बिहार के सीनेट इतिहास में यह पहली बार ऐसी दुखद घटना हुई है। जब सदस्य ने किसी कुलसचिव के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और मारने तक की धमकी दी। उन्होंने सरेआम मेरे खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया। मैं इस घटना से काफी आहत हूं। भाजपा एमएलसी इससे पहले फोन पर भी मुझे धमका चुके हैं। वह नियम के विरूद्ध जाकर काम करने का दबाव बनाते हैं। राजभवन और शिक्षा विभाग को स्वत: इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए।
भाजपा एमएलसी बोले- कुलसचिव को मारने की धमकी नहीं दी
वहीं भाजपा एमएलसी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मैंने किसी के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग नहीं किया। कुलसचिव को मारने की धमकी भी नहीं दी है। कुलसचिव और कुलपति के विवाद से पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की मर्यादा कम हुई। मामले की जांच होनी चाहिए।