1950 में केंद्रीय बजट हो गया था लीक, क्या थी वो घटना और उसके बाद क्या बदले नियम? 

अगले महीने बजट (Union Budget 2026) पेश किया जाने वाला है। बजट के मामले में काफी गोपनीयता बरती जाती है, क्योंकि इसमें संवेदनशील वित्तीय योजनाएं होती हैं। इसे समय से पहले लीक होने से बचाने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय किए जाते हैं, जिससे मार्केट में हेरफेर और रणनीतिक नुकसान को रोका जा सके। मगर क्या आप जानते हैं कि एक बार बजट वास्तव में लीक हो गया था? सन 1950 में क्या थी बजट लीक की कहानी, आइए जानते हैं।

कैसे लीक हुआ था बजट?
रिपोर्ट्स के अनुसार सन 1950 के भारतीय यूनियन बजट लीक में राष्ट्रपति भवन प्रेस से बजट के कुछ सीक्रेट पेज समय से पहले लीक हो गए थे। तब वित्त मंत्री जॉन मथाई थे। इसके बाद मथाई ने इस्तीफा दे दिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ज्यादा सुरक्षित प्रिंटिंग लोकेश (जैसे नॉर्थ ब्लॉक) पर काम शुरू किया गया और ‘लॉक-इन’ पीरियड जैसे सख्त प्रोटोकॉल लागू किए गए।

क्या होता है लॉक-इन पीरियड?
1950 का बजट लीक होना भारत के वित्तीय इतिहास में एक बड़ी घटना साबित हुआ, जिससे संवेदनशील बजट दस्तावेजों को संभालने के तरीके में लंबे समय तक चलने वाले बदलाव हुए। इससे गोपनीयता की जरूरत उजागर हुई, जिसके कारण सख्त ‘लॉक-इन’ सिस्टम लागू किया गया। इस सिस्टम के तहत बजट पेपर को लीक होने से रोकने के लिए प्रिंटिंग के दौरान अधिकारियों को अलग-थलग रखा जाता है।

फोन-इंटरनेट से बनी रहती है दूरी
सरकारी बजट के लिए “लॉक-इन पीरियड” एक सख्त, सीक्रेट दौर होता है, जिसमें बजट बनाने में शामिल वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को नॉर्थ ब्लॉक में बाहरी दुनिया (कोई फोन, इंटरनेट नहीं) से अलग कर दिया जाता है। जब तक कि वित्त मंत्री संसद में बजट पेश न कर दें, वे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। यह परंपरा औपचारिक “हलवा सेरेमनी” से शुरू होती है।

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