नए साल की इस तारीख तक नितिन नवीन बैठेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी पर

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन खरमास के बाद और गणतंत्र दिवस से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल सकते हैं। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 20 जनवरी को भाजपा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है। अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन 2029 तक इस पद पर बने रहेंगे। भाजपा सूत्रों की मानें तो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों की घोषणा होगी। इसके बाद चार दिन के अंदर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। राजनीतिक पंडितों की मानें तो नितिन नवीन के सामने पश्चिम बंगाल चुनाव सबसे बड़ी चुनौती होगी। बंगाल में भाजपा हर हाल में सत्ता चाहती है। ऐसे में युवा नितिन नवीन किस तरह बंगाल फतह कर पाएंगे? यह दिलचस्प होगा। इसके अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होना है।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि काफी मंथन के बाद भाजपा ने नितिन नवीन को जिम्मेदारी सौंपी हैं। इसलिए यह लगभग तय है कि वो ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि “नितिन नबीन जी ने एक कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। वे एक युवा और कर्मठ नेता हैं, जिन्हें संगठनात्मक अनुभव का भरपूर लाभ है और बिहार में विधायक और मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल प्रभावशाली रहा है। उन्होंने जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया है। वे अपने विनम्र स्वभाव और व्यावहारिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। मुझे विश्वास है कि उनकी ऊर्जा और समर्पण आने वाले समय में हमारी पार्टी को मजबूती प्रदान करेंगे। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव हो, या बिहार में प्रदेश युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष या छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी, उन्होंने संगठन के हर दायित्व को पूरी निष्ठा और सफलता से निभाया है। बिहार में 5 बार विधायक एवं प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में उनके पास जनता के बीच लम्बे समय से कार्य करने का अनुभव है।

जेपी नड्डा की तरह ही नितिन नवीन पर फैसला
चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- “जेपी नड्डा भी पहले कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए थे। बिहार में पले-बढ़े व्यक्ति और पहाड़ी का उस समय इस तरह उभरना चौंकाने वाला ही था। लेकिन, मोदी-शाह की भाजपा तो चौंकाने वाले फैसलों के लिए ही जानी जाती है। नितिन नवीन कायस्थ या बिहारी पहचान नहीं, बल्कि सांगठनिक कौशल के कारण कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचे हैं और जिस तरह से नाम उभरा है, विकल्प तलाशने की जरूरत शायद भाजपा नहीं समझ रही है।” यह बात तब और भी स्पष्ट हो गई, जब नितिन नवीन ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद पटना में जिस तरह से उनका ग्रैंड वेलकम हुआ और उन्होंने जिस तरह पंचायत से पार्लियामेंट तक भगवा लहराने की बात कही तो सारी अटकलों पर विराम लग गया। खरमास बाद सारी तस्वीरें साफ हो जाएंगी।

‘पंचायत से पार्लियामेंट तक भगवा लहराने का सपना’
इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने कार्यकर्ता को संबोधित करते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का सपना है कि पंचायत से पार्लियामेंट तक भगवा लहराए। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि नरेंद्र मोदी का सपना है कि एक लाख से अधिक युवा नेतृत्व निकाला जाय। यह तभी होगा जब एक लाख से अधिक हमारे युवा नेतृत्व पंचायत से पार्लियामेंट तक आगे बढ़ेंगे। आने वाले समय में पंचायत में और नगर निकाय में चुनाव होने हैं, इसलिए मैं सभी कार्यकर्ताओं को आगाह करता हूं कि अगर नेतृत्वकर्ता बनना है तो अपने-अपने क्षेत्र में जाइए और जनता से जुड़कर काम कीजिए। जनता की समस्याओं में खरा उतरिये। नितिन नवीन ने कहा कि जब आप ऐसा कीजिएगा तभी आप निश्चित रूप से आप में से कोई वार्ड काउंसलर बनेगा, कोई मुखिया बनेगा और कोई भविष्य का नेतृत्वकर्ता बनेगा। पंचायत निकाय चुनाव में हम सबको अभी से ही लग जाना होगा. तभी निश्चित रूप से यह चुनाव बदलते हुए बिहार की एक नई तस्वीर प्रदान करेगा। नितिन नवीन ने कहा कि अगर पंचायत और निकाय स्तर पर अगर अच्छा नेतृत्व खड़ा कर देंगे तो 2047 का बिहार भी विकसित बिहार बनकर उभरेगा।

पटना शहर से शुरुआत, भाजयुमो से दिखाई ताकत
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ देखती है और नितिन नवीन में उसे संभावना दिखी। हां, समय जरूर लगा। विधायक के रूप में नितिन नवीन पटना पश्चिमी क्षेत्र (अब, बांकीपुर विधानसभा) की पहचान बने। उप चुनाव में जीते और फिर हमेशा बड़े अंतर से जीतते ही रहे। केंद्र में भी जब भाजपा की सरकार बन गई तो नितिन नवीन का राजनीतिक रूप बढ़ा। विजन की स्पष्टता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को समझते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। 2016 से 2019 तक भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा करना नितिन नवीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में पहचान बनी तो दूसरे राज्य की तरफ भी भाजपा ने उन्हें भेजा। 2019 में सिक्कम का संगठन प्रभारी के रूप में और फिर जुलाई 2024 से छत्तीसगढ़ में नितिन नवीन ने संगठन के लिए जो काम किया और जैसी सक्रियता दिखाई, उसे स्वीकारने का प्रमाण है यह ताजा फैसला। छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में वह भाजपा के लिए पुनर्वापसी का मंत्र साबित हुए।

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