अंबाला: किसान सरसों की नई फसल को MSP से कम दाम पर बेचने को मजबूर

अंबाला शहर अनाज मंडी में इस बार गत वर्ष की तुलना में करीब 3 गुना सरसों आ चुका है। सरकारी खरीद अभी प्रारंभ नहीं होने के चलते किसानों को अपनी फसल प्राइवेट डीलरों या आढ़तियों को बेचनी पड़ रही है। सरकार ने सरसों का एमएसपी 6200 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन वर्तमान में काली सरसों का दाम 5550 से 5800 रुपये प्रति क्विंटल ही खुले बाजार में मिल रहा है। इसके विपरीत पीली सरसों के खुले बाजार में दाम 6200 से 7400 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। सरकार अलग से पीली सरसों व तोरिया की एमएसपी तय नहीं करती। 

किसान बिचौलियों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर

सरकारी खरीद में देरी, नकदी की जरूरत और बाजार में मंदी के कारण किसान बिचौलियों को औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं। शहर मंडी में करीब आधा दर्जन आढ़ती व डीलर सरसों खरीद बेच का काम करते हैं। सरसों की आवक फरवरी में शुरू हो जाती है, लेकिन सरकारी खरीद अमूमन मार्च के अंत या अप्रैल से शुरू होती है, जिससे किसान निजी व्यापारियों को कम दाम पर बेचने को मजबूर होते हैं। किसानों का कहना है खरीद सेंटर अंबाला शहर में नहीं होने के कारण उन्हें निजी तौर पर सरसों बेचनी पड़ रही है। खरीद केंद्र शहजादपुर मंडी में बनाया गया है वहां तक का खर्च ज्यादा होगा और फसल बेचने में भी समय लगेगा। अभी सरसों की खरीद शुरु भी नहीं हुई है। इन्ही कारणों से उन्हें फसल कम दामों में और निजी तौर पर बेचनी पड़ रही है।

वहीं अंबाला शहर अनाज मंडी में इस बार पिछली बार से आवक ज्यादा हुई है। खरीद केंद्र अंबाला शहर न होने के बाद भी किसान अंबाला शहर अनाज मंडी में सरसों बेचने के लिए ला रहे हैं और निजी तौर पर डीलरों को सरसों तय मूल्य से कम पर बेचने को मजबूर है। मार्किट कमेटी का इसको लेकर कहना है कि यह किसान की पसंद पर निर्भर है। किसान 28 मार्च से जब फसल की खरीद शुरू होगी तब बेच लें। सरकार ने खरीद केंद्र शहजादपुर तय किया है।

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