क्रिकेट जैसे खेल में तकनीक का इस्तेमाल नया नहीं है। एक समय थर्ड अंपायर रन आउट और करीबी कैच का फैसला लाल-हरी बत्ती जलाकर करते थे, जिसकी जगह अब स्टेडियम में लगी बिग स्क्रीन ने ले ली। इस विशालकाय टीवी में आउट या नॉटआउट लिखा आ जाता है। अंपायर्स के फैसले को चुनौती देने के लिए बल्लेबाज या गेंदबाज DRS (डिसीजन रीव्यू सिस्टम) की मदद लेते हैं तो हॉकआई से गेंद पिच पर कहां टप्पा खाई, पैड या फिर बैट दोनों में से कहां टकराई सब पता लग जाता है। विश्व कप के दौरान तो डेविड वॉर्नर सेंसर वाले बल्ले से ऑस्ट्रेलिया को विजेता बनाने की कोशिश में थे, लेकिन अब गेंद भी तकनीक से जुड़ती नजर आ रही है। खबरों की माने तो सेंसर वाले बल्ले के बाद अब क्रिकेट को माइक्रोचिप वाली गेंद मिलने जा रही है।

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