पंजाब में सरहद पर बढ़ी हलचल…दोगुने हुए बीएसएफ-आर्मी के जवान, सीमांत के किसानों को मिला आदेश

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के चलते सीमा पर बीएसएफ के साथ सेना की तैनाती भी बढ़ा दी है। पठानकोट से लेकर फाजिल्का तक 553 किलोमीटर लंबी सीमा पर सेना की गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं। इससे सरहदी गांवों के लोगों में दहशत बनी हुई है।

ग्रामीणों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि उन्हें किसी भी समय गांव खाली करने का आदेश दिए जा सकते हैं। जब जब भी दोनों देशों में तनाव की स्थिति पैदा हुई है, सीमावर्ती गांवों को खाली करवाया जाता रहा है।

फिरोजपुर के सीमांत गांव भाने वाला के ग्रामीण गुरदेव सिंह, मंगल सिंह व जोगिंदर सिंह का कहना है कि गांवों में सुरक्षा एजेंसियों के वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है। बीएसएफ जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है।

किसानों को जल्द फसल काटने के आदेश
ग्रामीणों ने बताया कि जिन किसानों की जमीन कंटीली तार के दूरी तरफ है, उन्हें जल्द फसल काटने के आदेश दिए गए हैं। किसान कंबाइन लेकर जल्द कटाई में जुट गए हैं। फिरोजपुर के गांव कालू वाला तीन तरफ सतलुज दरिया से घिरा है। इसके एक तरफ पाकिस्तान है। ग्रामीण मलकीत सिंह का कहना है कि इस गांव को सबसे पहले खाली करवाया जाता है। यहां के लोगों यहां रहने वाले ग्रामीण भयभीत हैं। हालांकि, यहां ऐसे हालात नए नहीं हैं।

सादकी व हुसैनीवाला बाॅर्डर पर होती रहेगी रिट्रीट सेरेमनी
बाॅर्डर एरिया विकास फ्रंट के प्रधान एवं बीएसएफ के को-आर्डिनेटर लीलाधर शर्मा ने बताया कि सादकी व हुसैनीवाला बाॅर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी होती रहेगी, लेकिन गेट बंद रहेंगे। दोनों देशों के जवान हाथ नहीं मिलाएंगे। आम लोग जीरो लाइन तक नहीं जा सकेंगे।

पठानकोट बाॅर्डर पर दोगुना हुई जवानों की संख्या
पठानकोट में भी पाकिस्तान से सटी सीमा पर सेना के जवानों की संख्या दोगुना कर दी गई है। पठानकोट जिले के 15 गांवों की सीमा पाकिस्तान से लगती है। पहलगाम की घटना के बाद हेलिकाॅप्टर और ड्राेन के जरिये आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आतंकियों के सीमा पार करने की आशंका है। शहरी व ग्रामीण इलाकों में पुलिस और घातक कमांडो कड़ी चेकिंग कर रहे हैं। छोटे रास्तों पर भी स्पेशल टीमें गश्त कर रही हैं। इस ऑपरेशन में स्पेशल आपरेशन ग्रुप, घातक टीम और कमांडो यूनिट तैनात है।

सेना के एक अधिकारी का कहना था कि आतंकी जब भी मिशन पर निकलते हैं, तो सबसे पहले दरिया के रास्ते होते हुए जंगली क्षेत्र में पनाह लेते हैं। वह एक-दो दिन का खाना लेकर चलते हैं। खाना-पानी खत्म होते ही वे गांवों में मदद के लिए पहुंचते हैं। कई लोगों को जबरदस्ती अपने साथ मिलाकर सेना की इनपुट हासिल करते हैं और उसके बाद गोलीबारी की घटना को अंजाम देते हैं। इस वजह से सेना ने अब घने जंगलों वाले क्षेत्रों के आसपास गांव के लोगों से संपर्क साधना शुरू किया हुआ है।

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