राखी बांधते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए? मंत्र के उच्चारण का सही तरीका यहां पढ़ें

रक्षाबंधन का पर्व मुख्य रूप से भाई और बहन के प्रेम के लिए समर्पित होता है और इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाने के साथ राखी का धागा भी बांधती हैं।
ये राखी उनके प्रेम का प्रतीक बनती है और भाई इसके बदले में हमेशा सुरक्षा का वचन देते हैं। यूं कहा जाए कि यह पर्व बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते को समर्पित होता है और इस बंधन को अटूट बनाता है।
रक्षाबंधन के दिन बहनें राखी की थाली पहले से सजाती हैं और भाई की सलामती के लिए उस समय तक उपवास भी रखती हैं जब तक कि राखी न बंध जाए। इसके साथ ही, राखी बांधते समय एक मंत्र का उच्चारण करना भी विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
यदि बहनें इस मंत्र का उच्चारण करते हुए भाई की कलाई में राखी बांधती हैं तो उसे सभी समस्याओं से बहार निकाला जा सकता है। आइए जानें कौन सा है मंत्र और उसके उच्चारण का सही तरीका क्या है?
राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें
जब बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांध रही हों तब उन्हें एक मंत्र जरूर पढ़ना चाहिए-
‘येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥’
इस मंत्र का अर्थ क्या है?
जिस रक्षासूत्र से दानवों के महाबली और शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, वही रक्षा का सूत्र मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम स्थिर रहो, अपने संकल्प से कभी विचलित मत हो। इस मंत्र में राक्षसों के राजा बलि का उल्लेख किया गया है और यह मंत्र बताता बताता है कि यह सूत्र राजा बलि को बांधा गया था। उसी सूत्र को जब बहनें मंत्रोचारण के साथ भाई की कलाई में बांधती हैं, तो भाई को सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है।
राखी बांधते समय कैसे करें मंत्र का उच्चारण
जब आप भाई को राखी बांध रही हैं, तो सबसे पहले सभी भगवानों का पूजन करें और उन्हें राखी बांधें। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।
बहनें अपने भाई के सिर पर रुमाल रखें और माथे पर तिलक लगाएं। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा का सूत्र बांधें और यह मंत्र पढ़ें।
आपको मंत्र पढ़ते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी गलत मंत्र न पढ़ें।
मंत्र पढ़ने के साथ भाई को उनकी सलामती और दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करें और उनसे अपनी सुरक्षा का वचन लें।
अगर आप भी इस विधि से अपने भाई की कलाई में राखी बांधती हैं और मंत्र का सही उच्चारण करती हैं, तो भाई को दीर्घयु का आशीर्वाद मिलता है।



