अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने भारत का खुलकर किया समर्थन,जारी की हिंद-प्रशांत रणनीतिक रिपोर्ट

अमेरिका ने हिंद-प्रशांत रणनीतिक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि भारत भू-राजनीतिक चुनौतियों, खासकर चीन और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उसकी आक्रामकता का सामना कर रहा है। शुक्रवार को पहली बार जारी की गई इस क्षेत्र विशेष रिपोर्ट में राष्ट्रपति जो बाइडन के हिंद-प्रशांत में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करने, क्षेत्र को सशक्त बनाने और इस प्रक्रिया में भारत के उदय व क्षेत्रीय नेतृत्व का समर्थन करने के दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया है। है। अमेरिका की यह टिप्‍पणी इस लिहाज से उपयोगी है, क्‍योंकि एस-400 मिसाइल के बाद पहली बार अमेरिकी राष्‍ट्रपति बाइडन ने भारत का खुलकर समर्थन किया है। यह भारत और अमेरिका के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।

व्हाइट हाउस ने कहा, ‘हम रणनीतिक साझेदारी का निर्माण जारी रखेंगे, जिसमें अमेरिका व भारत दक्षिण एशिया में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एकसाथ और क्षेत्रीय समूहों के माध्यम से काम करते हैं। स्वास्थ्य, अंतरिक्ष व साइबर स्पेस जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग करते हैं। आर्थिक व प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करते हैं और स्वतंत्र व मुक्त हिंद-प्रशांत में योगदान करते हैं।’ अमेरिका ने कहा, ‘हम मानते हैं कि भारत, दक्षिण एशिया व हिंद महासागर में एक समान विचारधारा वाला भागीदार और नेतृत्वकर्ता है।’हालांकि, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ‘भारत को बहुत महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के व्यवहार का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ा है।’ मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास भारतीय व चीनी सैनिकों में संघर्ष के बाद दोनों देशों ने तनाव के बीच सीमा पर जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। इन देशों से संबंध मजबूत करने पर बल : रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका प्रमुख क्षेत्रीय साझेदारों भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, मंगोलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, ताइवान, वियतनाम व प्रशांत द्वीपों से संबंध बेहतर करने पर बल देगा। इसके अनुसार, ‘हम चीन को बदलना नहीं चाहते, बल्कि रणनीतिक वातावरण को अमेरिका व उसके साझेदारों के अनुकूल करना चाहते हैं।’

आर्थिक, कूटनीतिक व सैन्य ताकतों को जोड़ रहा चीन : रणनीतिक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपनी आर्थिक, कूटनीतिक, सैन्य और तकनीकी ताकत को जोड़ रहा है। वह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रभाव जमाना चाहता है। चीन का दबाव और आक्रामकता दुनियाभर में फैली हुई है, लेकिन हिंद-प्रशांत में सबसे गंभीर है। आस्ट्रेलिया के आर्थिक दबाव से लेकर भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर संघर्ष तक, ताइवान पर बढ़ते दबाव और पूर्वी एवं दक्षिण चीन सागर में पड़ोसियों को डराने-धमकाने तक, इस क्षेत्र में हमारे सहयोगी और भागीदार चीन के इस नुकसानदायक व्यवहार को झेल रहे हैं। चीन नौवहन की स्वतंत्रता सहित मानवाधिकारों व अंतरराष्ट्रीय कानून के साथ उन सिद्धांतों को भी कमजोर कर रहा है, जिससे हिंद-प्रशांत में स्थिरता व समृद्धि आई है।

क्वाड व अन्य क्षेत्रीय मंचों की प्रेरक शक्ति है भारत

रणनीतिक रिपोर्ट ऐसे समय में जारी की गई, जब आस्ट्रेलिया में क्वाड की वार्ता चल रही थी। आस्ट्रेलिया, भारत, जापान व अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार को क्षेत्र में चीन की उग्र भूमिका पर चिंता व्यक्त की थी। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘भारत क्वाड व अन्य क्षेत्रीय मंचों की प्रेरक शक्ति और क्षेत्रीय विकास का एक इंजन है। वह क्षेत्रीय मुद्दों पर बेबाक राय रखता है और समस्याओं के समाधान के साझा प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाता है।’

नए दृष्टिकोण के दो पहलू

अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि नए दृष्टिकोण के दो पहलू हैं। पहला, क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका को मजबूत करना और दूसरा 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों के बीच सामूहिक क्षमता में वृद्धि करना।

भारत से संबंध सुधारने के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों की तारीफ

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के महत्व व चुनौतियों की जबरदस्त सराहना हुई है। यह मान्यता है कि भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और पिछले प्रशासन के बेहतर काम को जारी रखने की इच्छा है, ताकि उस रिश्ते को व्यापक और गहरा किया जा सके।’ वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत पिछले चार अमेरिकी प्रशासनों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, खासकर भारत से संबंध सुधारने की दिशा में बहुत अच्छा काम किया है। भारत कई मायनों में आस्ट्रेलिया व अन्य देशों से बहुत अलग स्थान रखता है।

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