समोसे-कचौड़ी भूल जाएंगे जब चखेंगे पूर्वी भारत का यह ‘देसी सुपरफूड’

भारत में खानपान की परंपराएं बहुत गहरी और दिलचस्प हैं। इन्हीं में से एक बेहद खास और पारंपरिक व्यंजन है ‘पिठा’।

यह मुख्य रूप से पूर्वी भारत- जैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार में बड़े चाव से खाया जाता है। मुख्य तौर पर चावल के आटे से तैयार होने वाला यह व्यंजन अपनी खासियत के कारण मीठे और नमकीन, दोनों ही रूपों में लोगों का दिल जीत लेता है।

खेती-किसानी और जश्न से जुड़ा है इतिहास
पिठा का सीधा संबंध हमारे ग्रामीण जीवन और कृषि परंपराओं से है। इसकी शुरुआत की कहानी बहुत ही रोचक है। पुराने समय में जब खेतों में धान की नई फसल कटकर घर आती थी, तो उसी नए चावल से पिठा बनाकर फसल का उत्सव मनाया जाता था। समय के साथ यह खुशी मनाने का एक अहम हिस्सा बन गया और धीरे-धीरे इसे पारंपरिक तरीके से हर घर में बनाया जाने लगा।

अलग-अलग नाम, पर प्यार वही
भारत की विविधता इस व्यंजन में भी देखने को मिलती है। अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। बंगाल में इसे ‘पातिशप्त’ कहा जाता है, असम में यह ‘टिल पिठा’ कहलाता है, तो वहीं ओडिशा में इसे ‘मांडा पिठा’ के नाम से जाना जाता है। त्योहारों से भी इसका गहरा नाता है, खासतौर से ओडिशा में मकर संक्रांति और रथ यात्रा जैसे शुभ अवसरों पर पिठा बनाने का बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना
पिठा खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, सेहत के लिए भी उतना ही अच्छा माना जाता है। इसे बनाने में पूरी तरह से प्राकृतिक और पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि यह खाने में बहुत हल्का होता है और आसानी से पच भी जाता है। हर क्षेत्र के अनुसार इसे बनाने का तरीका और इसका स्वाद बदल जाता है।

मीठा भी और नमकीन भी
अगर इसके प्रकारों की बात करें, तो मीठा पिठा अकसर गुड़, ताजे नारियल और तिल की स्वादिष्ट स्टफिंग के साथ तैयार किया जाता है। वहीं, जिन्हें चटपटा पसंद है, उनके लिए नमकीन पिठा बनाया जाता है, जिसके अंदर दाल या ताजी सब्जियों की भराई की जाती है।

इसे पकाने के तरीके भी अलग-अलग हैं। उदाहरण के लिए, ‘मांडा पिठा’ को भाप में पकाया जाता है, जो इसे बेहद हेल्दी बनाता है। इसके अलावा, पिठा को तेल में तलकर भी बनाया जाता है, जिससे यह एकदम कुरकुरा और बेहद स्वादिष्ट हो जाता है।

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