पंजाब: धान खरीद सीजन में बारिश का झटका, मंडियों में भरा पानी

रविवार सुबह हुई बारिश ने फाजिल्का समेत पंजाब की अन्य अनाज मंडियों में प्रबंधों की पोल खोल दी। बारिश के कारण मंडी की सड़कों पर पानी भर गया, जिससे वहां खुले में पड़ी धान की फसल भीग गई। पानी की निकासी के उचित प्रबंध न होने के कारण किसानों और आढ़तियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। धान की खरीद के सीजन के दौरान पैदा हुई इस स्थिति ने मंडी के प्रबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए आढ़ती यूनियन के प्रधान संजीव सचदेवा गोल्डी ने बताया कि तड़के हुई बारिश के कारण अनाज मंडी में पड़ी धान की फसल बारिश की चपेट में आ गई। मंडी की सड़कों पर पानी भरने से धान की ढेरियां प्रभावित हुईं और फसल को संभालना मुश्किल हो गया।
उन्होंने कहा कि धान की फसल को बारिश और पानी से बचाने के लिए मंडी में पहले से ही उचित प्रबंध किए जाने चाहिए थे। धान की खरीद के महत्वपूर्ण सीजन में पानी की निकासी का सही इंतजाम न होना किसानों और आढ़तियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
मंडी में पानी भरने से जहां धान की फसल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित होने की आशंका है। किसान कई महीनों की मेहनत से तैयार की गई फसल को बेचने के लिए मंडियों में पहुंच रहे हैं, लेकिन बारिश के दौरान उचित प्रबंधों की कमी के कारण उन्हें अतिरिक्त परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।
फिरोजपुर दाना मंडी में भीगा धान
वहीं, फिरोजपुर शहर की दाना मंडी में रविवार सुबह से हो रही लगातार बारिश के कारण खुले में पड़ा धान भीग रहा है। मंडी में धान की फसल को तिरपालों से ढककर सुरक्षित रखने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर बारिश का पानी धान तक पहुंच गया, जिससे फसल प्रभावित हुई है। आसमान में लगातार बादल छाए रहने और बारिश जारी रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। मंडियों में अपनी फसल लेकर पहुंचे किसान खरीद और मौसम को लेकर परेशान हैं। बारिश के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। मंडी में बारिश के बीच किसानों के चेहरों पर उदासी साफ दिखाई दे रही है। किसानों को अब मौसम साफ होने का इंतजार है।
17 प्रतिशत से अधिक नमी पर फंस सकती है सरकारी खरीद
केंद्र सरकार की ओर से खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए लागू धान खरीद मानकों की पुष्टि करते हुए संबंधित आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी है। उपलब्ध केंद्रीय मानकों के अनुसार, खरीफ विपणन सीजन 2025-26 में सरकारी खरीद के लिए धान में नमी की अधिकतम सीमा 17 प्रतिशत निर्धारित थी। इसे ही फिलहाल संदर्भ मानक के रूप में समझा जाना चाहिए। मौजूदा सीजन में लागू किसी नए आदेश या विशेष छूट की अलग से पुष्टि आवश्यक है।
धान में नमी अधिक होने पर खरीद एजेंसियां गुणवत्ता की जांच के दौरान फसल को निर्धारित मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर तत्काल खरीद से रोक सकती है। बारिश के बाद नमी बढ़ने की स्थिति में किसानों को धान सुखाने और दोबारा जांच कराने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। इससे मंडियों में फसल का जमाव बढ़ने और खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।



