मुख्य सचिव व दक्षिण पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ की अध्यक्षता में ‘राज्य युद्ध पुस्तक’ एवं सिविल-मिलिट्री कोऑर्डिनेशन कमेटी की समीक्षा बैठक आयोजित

जयपुर, 6 अक्टूबर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य की सुरक्षा तैयारियों, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक मुस्तैदी को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिक प्रशासन और सशस्त्र बलों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, ऐसे में प्रशासनिक अमले और सैन्य बलों को एकीकृत सोच के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

मुख्य सचिव मंगलवार को शासन सचिवालय में ‘राज्य युद्ध पुस्तक’ (स्टेट वार बुक) और ‘सिविल-मिलिट्री कोऑर्डिनेशन कमेटी’ की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का ध्येय है कि किसी भी आपात स्थिति या अप्रत्याशित संकट में राज्य का तंत्र बिना विलंब, पूरी गतिशीलता और सटीकता के साथ प्रतिक्रिया दे सके। इसके लिए आपसी संवाद, मानक संचालन प्रक्रिया और संयुक्त कार्य-योजनाओं को निरंतर मजबूत करने के साथ राज्य युद्ध पुस्तक को अद्यतन किया जाना जरूरी है।
सेना की ओर से संस्थागत समन्वय पर जोर-
दक्षिण-पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल पदम सिंह शेखावत ने कहा कि बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों के बीच नागरिक प्रशासन और सशस्त्र बलों के आपसी समन्वय को और अधिक संस्थागत एवं सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘यूनियन वॉर बुक’ की तर्ज पर ‘स्टेट वॉर बुक’ को पूरी तरह अद्यतन रखना और सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच नियमित संवाद एवं एस ओ पी का पालन करना आज की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

युद्ध पुस्तक अद्यतन करने के निर्देश-
मुख्य सचिव ने कहा कि युद्ध पुस्तक केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रभावी ब्लूप्रिंट है। उन्होंने निर्देश दिए कि इसमें प्रशासनिक मशीनरी के हर स्तर पर कमान और नियंत्रण की स्पष्ट रूपरेखा दर्ज की जाए तथा सभी आवश्यक जानकारियां हमेशा अद्यतन रखी जाएं।
रक्षा भूमि मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश-
बैठक में दक्षिण-पश्चिमी कमान से प्राप्त विभिन्न महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। रक्षा भूमि के मामलों में जयपुर, कोटा, श्रीगंगानगर और भरतपुर सहित विभिन्न जिलों में रक्षा भूमि के बार्टर, समयबद्ध म्यूटेशन तथा फॉरवर्ड कंपोजिट एविएशन बेस और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं के लिए भूमि अवाप्ति से जुड़े लंबित मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करने और प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के निर्देश दिए गए।

काउंटर-ड्रोन प्रणाली ‘प्रबल 3.0’ का प्रदर्शन-
बैठक के उपरांत सेना के अधिकारियों द्वारा ‘प्रबल 3.0’ ड्रोन जैमर एवं काउंटर-ड्रोन प्रणाली की तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। मुख्य सचिव ने इस प्रदर्शन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से होने वाली अवैध गतिविधियों और तस्करी की रोकथाम के लिए इस प्रणाली का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस कर्मियों को इस आधुनिक तकनीक में पूरी तरह प्रशिक्षित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल संचालित करने के निर्देश दिए गए।
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और स्थानीय सहभागिता-
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास और सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करने के लिए स्थानीय वॉलंटियर्स तथा पूर्व सैनिकों की उपयोगिता और उनके डेटा बैंक के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के कल्याण पर जोर-
बैठक में पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और सेवारत कर्मियों के कल्याण के लिए रेक्सको के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, ग्रेच्युटी लाभों के क्रियान्वयन तथा राज्य सेवाओं में पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए निर्धारित आरक्षण एवं रोजगार के प्रावधानों को नियमानुसार पूरी प्रतिबद्धता से लागू करने के निर्देश दिए गए।

बैठक के अंत में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने सभी विभागों के अधिकारियों से रूटीन कार्यशैली से हटकर प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युद्ध पुस्तक में तय अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ किया जाए। राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, पूर्व सैनिकों के कल्याण और क्षेत्रीय अखंडता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बैठक के दौरान सेना सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे



