नवरात्रि में जौ बोने की क्या है वजह ?

साल में दो बार नवरात्रि का पर्व प्रमुख रूप से मनाया जाता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और इसका समापन 19 अक्टूबर को होगा. नौ दिनों तक भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा कर मां का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं. नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है. इस पूजा में कलश के पास जौ बोए जाते हैं, जो कुछ दिनों में अंकुरित होकर हरे-भरे हो जाते हैं. हिंदू धर्म में जौ को शुभता, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि नवरात्रि की कलश स्थापना में जौ बोने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब सबसे पहली फसल जौ ही थी. इसलिए नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा में जौ बोए जाते हैं. जौ का धार्मिक महत्व सिर्फ नवरात्रि तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. हवन, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यों में जौ को महत्वपूर्ण माना जाता है. जौ को सांकेतिक तौर पर भी देखा जाता है. इसके अंकुरित होने और बढ़ने को जीवन, उन्नति और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि अगर नवरात्रि के दौरान बोए गए जौ तेजी से बढ़ते हैं और उनका रंग हरा रहता है, तो इसे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली का संकेत माना जाता है. वहीं, अगर जौ ठीक से अंकुरित न हों, छोटे रह जाएं या उनका रंग काला पड़ जाए, तो कुछ मान्यताओं में इसे शुभ नहीं माना जाता है.

नवरात्रि में जौ के रंग और उनके बढ़ने के तरीके को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. अगर जौ नीचे से पीले हैं और ऊपर से हरे हैं, तो ऐसा माना जाता है कि साल का आधा समय अच्छा रहेगा और आधे समय में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं, अगर जौ का निचला हिस्सा सफेद है और ऊपर से जौ हरे हैं, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा होने पर साल भर घर में खुशियां बनी रह सकती हैं और जीवन में तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं.

नवरात्रि के दौरान जौ कुछ ही दिनों में अंकुरित होकर हरे-भरे हो जाते हैं. इसे प्रकृति में नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा को नवरात्रि की पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. भक्त इन अंकुरित जौ को मां दुर्गा का आशीर्वाद मानकर पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं या घर के पवित्र स्थान पर रखते हैं.

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