नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा के लिए ऐसे बनाएं मुंह में घुलने वाले मालपुए

शारदीय नवरात्र का चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप, यानी मां कूष्मांडा को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, माता कूष्मांडा को मालपुए का भोग बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि माता को मालपुए का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
हालांकि, अक्सर व्रत वाले मालपुए बनाते समय लोगों की यह शिकायत रहती है कि वे या तो कड़ाही में चिपक जाते हैं या फिर पलटते समय टूट कर बिखर जाते हैं। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो हम आपके लिए मालपुए की एक ऐसी परफेक्ट रेसिपी लेकर आए हैं, जिसे आप 14 अक्टूबर को चौथे नवरात्र के भोग के लिए ट्राई कर सकते हैं। यकीन मानिए, इस विधि से आपके मालपुए एकदम मुलायम और रसीले बनेंगे।
मालपुए बनाने के लिए जरूरी सामग्री
सिंघाड़े या राजगिरा का आटा – 1 कप
पका हुआ केला – 1 (अच्छी तरह मैश किया हुआ)
दूध – आधा कप (घोल बनाने के लिए)
इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच
चीनी – 1 कप (चाशनी के लिए)
पानी – 1 कप
देसी घी – तलने के लिए
कटे हुए मेवे (बादाम, पिस्ता) – सजावट के लिए
मालपुबनाने की आसान विधि
एक बर्तन में एक कप चीनी और एक कप पानी डालकर गैस पर रखें। इसे मीडियम आंच पर तब तक पकाएं जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए और एक हल्की चिपचिपी चाशनी तैयार न हो जाए। खुशबू के लिए इसमें थोड़ा सा इलायची पाउडर मिला लें और गैस बंद कर दें।
एक बड़े बर्तन में सिंघाड़े का आटा लें। इसमें अच्छी तरह से मैश किया हुआ केला मिला लें। केले का इस्तेमाल करने से मालपुए में शानदार बाइंडिंग आती है, जिससे वे कड़ाही में बिल्कुल नहीं फटते। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा दूध डालते हुए एक चिकना घोल तैयार कर लें। ध्यान रहे कि घोल में कोई गांठ न रहे और यह न तो बहुत ज्यादा गाढ़ा हो और न ही पानी जैसा पतला।
एक चपटे तले वाले पैन या चौड़ी कड़ाही में देसी घी गर्म करें। घी के मीडियम गर्म होने पर, एक बड़े चम्मच से घोल लें और धीरे से पैन के बीच में डालें। इसे चम्मच से फैलाने की जरूरत नहीं है, यह खुद अपना आकार ले लेगा।
जब मालपुआ एक तरफ से हल्का सुनहरा और किनारे से क्रिस्पी दिखने लगे, तो उसे बड़ी सावधानी से पलट लें। दोनों तरफ से गोल्डन ब्राउन होने तक तलें। इसके बाद इन्हें निकालकर सीधा हल्की गर्म चाशनी में डाल दें। 2-3 मिनट तक मालपुओं को चाशनी में ही रहने दें ताकि वे अंदर तक रसीले हो जाएं।



