तुर्कीये और सीरिया में भारतीय सेना की 60 पैराफील्ड हॉस्पिटल यूनिट दे रही है सेवा..

तुर्कीये और सीरिया में आए भूकंप ने भारी तबाही मचाई हुई है। अब तक भूकंप से मरने वालों की संख्या 28000 के पार हो चुकी है। दोनों देशों की मदद के लिए दुनिया के कई देश आगे है। इसी कड़ी में भारत भी शामिल है। भारत ने हर समय आपदा से प्रभावित होने वाले किसी भी देश में, संकट में, युद्ध में सबसे पहले मदद पहुंचाई है। भारत में जरूरी सामान के साथ राहत बचाव के टीम तुर्कीये और सीरिया में भेजी है। भारतीय सेना का 60 पैराफील्ड अस्पताल की यूनिट ने तुर्कीये और सीरिया के भूकंप से बचे लोगों की नि:स्वार्थ सेवा के लिए दुनिया भर से सराहना प्राप्त की है। भारत की यह मेडिकल यूनिट निरंतर दोनों देशों में फंसे लोगों को लगातार मदद पहुंचा रही है।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को ट्वीट किया कि इस्केंडरन, हटे, तुर्कीये में सेना के फील्ड ने अस्पताल में मेडिकल, सर्जिकल और इमरजेंसी वार्ड, एक्स-रे लैब और मेडिकल स्टोर चलाने के साथ काम करना शुरू कर दिया है। जयशंकर ने बुधवार को ट्विटर पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि तुर्किये के हटे में यह फील्ड अस्पताल भूकंप से प्रभावित लोगों का इलाज करेगा चिकित्सा और महत्वपूर्ण देखभाल विशेषज्ञ और उपकरणों की हमारी टीम आपात स्थिति का इलाज करने की तैयारी में जुटी हुई है।

कोरिया युद्ध में भी देवदूत बन कर की थी मदद

भारतीय सेना की 60 पैराफील्ड हॉस्पिटल की यूनिट पहली बार सुर्खियों में नहीं है बल्कि वह इससे पहले भी विभिन्न देशों में संकट के दौरान सेवा दे चुके हैं। भारत की यह मेडिकल यूनिट ने 1950 से 1954 के बीच कोरिया युद्ध के समय में वहां देवदूत बनकर काम किया था। मेडिकल यूनिट ने कोरिया युद्ध के समय 2 लाख से अधिक लोगों का इलाज किया था। कोरिया युद्ध के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का समर्थन किया था इसके तहत भारतीय सेना की एक मेडिकल यूनिट 60 पैराफील्ड अस्पताल की तैनाती की गई थी। जिसकी कमान लेफ्टिनेंट कर्नल एजी रंगराज ने संभाली थी।

कोरिया में 60 पैराफील्ड हॉस्पिटल की यूनिट ने दो भागों में बंटकर दी थी सेवा

20 नवंबर 1950 को 60 पैराफील्ड अस्पताल की यूनिट पुसान में उतरी थी। तो वहीं 29 नवंबर 1950 को कोरिया युद्ध में इसकी पहली तैनाती प्योंगयांग में की गई थी। टीम को दो सब यूनिट में बांटा गया था। पहली ‘फॉरवर्ड एलीमेंट’, जिसे 27 ब्रिटिश ब्रिगेड के साथ ग्रुप में रखा गया था और दूसरी ‘एडमिनिस्ट्रेटिव एलीमेंट’, जिसके ऊपर डेगू में कोरियन आर्मी हॉस्पिटल में सहायता करने और नागरिकों का इलाज करने का जिम्मा सौंपा गया था।

“ऑपरेशन कमांडो, ऑपरेशन किलर” नामक कई ऑपरेशनों में भाग ले चुकी है टीम

1 जुलाई 1951 को कॉमनवेल्थ डिवीजन का गठन हुआ जिसके बाद यूनिट 28 ब्रिटिश ब्रिगेड की कमान में शामिल हुई थी। भारतीय सेना की इस मेडिकल टीम ने 3 अगस्त 1953 तक “ऑपरेशन कमांडो और ऑपरेशन किलर” नामक कई ऑपरेशनों में भाग लिया था। यूनिट में भारत के 627 जवान शामिल थे। लेकिन तैनाती के दौरान हमने 3 जवानों को भी खोया था। जबकि 23 जवान घायल भी हुए थे। 60 पैरा फील्ड अस्पताल यूनिट ने कोरियाई युद्ध के दौरान आम नागरिकों समेत 2,22,324 लोगों का इलाज किया था।

अमेरिका और कोरिया से टीम को मिले थे प्रशस्ति पत्र

यूनिट को अमेरिका और दक्षिण कोरियाई सेना प्रमुखों की ओर से प्रशस्ति पत्र और उनके मूल गठन के लिए प्रथम राष्ट्रमंडल डिवीजन से प्रशस्तियां भी प्रदान की गई थी।ऑपरेशन दोस्त के तहत भारत ने तुर्की और सीरिया में भूकंप राहत प्रयासों के लिए बचाव कर्मियों, आवश्यक वस्तुओं और चिकित्सा उपकरणों को लेकर छह विमान भेजे हैं। भूकंप प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए तुर्की के हटे में स्थापित भारतीय सेना के फील्ड अस्पताल ने गुरुवार को काम करना शुरू कर दिया है।

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