12 जिलों में 21,850 शिक्षक संभालेंगे नशे के खिलाफ मोर्चा, नशे की लत के शुरुआती संकेत पहचानने पर जोर
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि कोई भी बच्चा नशे के अंधकार में जाने से पहले मदद की पहुंच में आ सकता है। शिक्षकों को किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक जरूरतों और नशे से जुड़े जोखिमों को समझने के साथ-साथ संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान को अब स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी है। भगवंत मान सरकार राज्य के 12 जिलों में 21,850 से अधिक शिक्षकों को नशे के दुरुपयोग और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर प्रशिक्षित करेगी। अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के तहत 500 से अधिक प्रशिक्षण बैच आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत फाजिल्का और तरनतारन से की गई है। पिछले सप्ताह दोनों जिलों में 800 से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण कार्यशालाओं में हिस्सा लिया। इसके बाद फिरोजपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, मोहाली, रोपड़, कपूरथला, लुधियाना और पटियाला में चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक तनाव, चिंता, भावनात्मक परेशानी और नशे की ओर बढ़ने के शुरुआती संकेत पहचानने में सक्षम बनाना है। सरकार का मानना है कि शिक्षक विद्यार्थियों के साथ लंबे समय तक संपर्क में रहते हैं और उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों को सबसे पहले पहचान सकते हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि कोई भी बच्चा नशे के अंधकार में जाने से पहले मदद की पहुंच में आ सकता है। शिक्षकों को किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक जरूरतों और नशे से जुड़े जोखिमों को समझने के साथ-साथ संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल के तहत शिक्षकों को तनाव से स्वस्थ तरीके से निपटने के उपायों को बढ़ावा देने, संघर्ष कर रहे विद्यार्थियों को समय रहते सहायता से जोड़ने और स्कूलों में सामाजिक कलंक से मुक्त वातावरण तैयार करने के लिए तैयार किया जाएगा।
कार्यक्रम को एससीईआरटी, सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग और डीआईटीएसयू के सहयोग से लागू किया जा रहा है। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक विद्यार्थियों के साथ जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित करेंगे, जबकि फीडबैक और निगरानी व्यवस्था के जरिए कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन किया जाएगा।


