बिहार: विदेशों में लाखों की नौकरी छोड़ी, बंजर जमीन पर उगाई स्ट्रॉबेरी…

गया के बहेरा गांव के एमबीए युवक अब्दुल कादिर ने सऊदी अरब की लाखों की नौकरी छोड़कर गांव लौट आधुनिक खेती शुरू की। बंजर जमीन पर स्ट्रॉबेरी, केला, अमरूद और नींबू की सफल खेती कर वे किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

गया जी जिले के एक युवा ने विदेश की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर खेती को अपनाते हुए नई मिसाल कायम की है। एमबीए की पढ़ाई कर सऊदी अरब में मैनेजर के पद पर काम कर चुके अब्दुल कादिर आज अपने गांव की बंजर जमीन पर स्ट्रॉबेरी समेत कई फलों और सब्जियों की आधुनिक खेती कर रहे हैं। उनकी मेहनत से जहां जमीन उपजाऊ बनी है, वहीं वे आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन गए हैं।

गया जी जिले के बहेरा गांव के रहने वाले अब्दुल कादिर ने साबित कर दिया है कि मजबूत सोच और मेहनत के दम पर बंजर जमीन भी सोना उगल सकती है। एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विदेश में लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने का साहसिक फैसला लिया और आज आधुनिक खेती के जरिए नई पहचान बना रहे हैं।

अब्दुल कादिर ने हैदराबाद स्थित उस्मानिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई की। पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली में करीब दो साल तक नौकरी की। इसके बाद बेहतर अवसर मिलने पर वे सऊदी अरब चले गए, जहां एक कंपनी में मैनेजर के पद पर लगभग चार साल तक काम किया। विदेश में अच्छी सैलरी और आरामदायक जीवन होने के बावजूद उनका मन हमेशा अपने गांव और खेती से जुड़ा रहा।

आखिरकार उन्होंने विदेश की नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया और अपने गांव बहेरा लौट आए। गांव पहुंचने के बाद उन्होंने वहां की बंजर पड़ी जमीन को उपजाऊ बनाने का संकल्प लिया। शुरुआत में यह काम आसान नहीं था, क्योंकि जिस जमीन पर उन्होंने खेती शुरू की वह लंबे समय से अनुपजाऊ पड़ी थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आधुनिक तकनीक तथा वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर खेती की शुरुआत की।

आज उसी जमीन पर स्ट्रॉबेरी, केला, अमरूद और नींबू जैसी फसलों की सफल मिश्रित खेती हो रही है। इसके साथ ही वे कई तरह की सब्जियों की भी खेती कर रहे हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और सही प्रबंधन के कारण उन्हें अच्छी पैदावार मिल रही है।

अब्दुल कादिर का कहना है कि अगर खेती को सही योजना, वैज्ञानिक तरीके और बाजार की समझ के साथ किया जाए तो यह किसी बड़े कारोबार से कम नहीं है। उनका मानना है कि गांव के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर भटकने की जरूरत नहीं है। अगर वे चाहें तो अपने गांव में ही खेती और कृषि आधारित व्यवसाय के जरिए बेहतर भविष्य बना सकते हैं।

उनकी इस पहल का असर आसपास के किसानों पर भी दिखने लगा है। पहले जिस जमीन को लोग बंजर मानते थे, आज वहां हरियाली और फलों के पौधे लहलहा रहे हैं। गांव और आसपास के कई किसान अब्दुल कादिर के खेतों पर पहुंचकर खेती के नए तरीके सीख रहे हैं और आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अब्दुल कादिर की मेहनत और लगन ने गांव की तस्वीर बदल दी है। उनकी सफलता से यह साबित हो गया है कि अगर सही सोच और मेहनत हो तो खेती भी सम्मानजनक और लाभकारी पेशा बन सकती है।

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